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सुल्तानपुर:  अनियंत्रित मैजिक की टक्कर में बाइक सवार पिता पुत्र की मौत हो गई,अलीगंज चौकी क्षेत्र के रहने वाले इरफान(65) व उनके पुत्र रिजवान (30) अपने घर से क्लीनिक रामपुर के लिए सुबह करीब 10.30 बजे मोटर सायकिल से जा रहे थे तभी सामने से आ रही मैजिक गाड़ी ने ने जोरदार टक्कर मार दी जिससे पिता पुत्र की दर्दनाक मौत हो गई। परिवार वालों का रो रो कर बुरा हाल ।


मामला अलीगंज के चंदौकी गांव के रहने वाले रिजवान अपने दो पुत्रों इरफ़ान और गुफरान को लेकर बाइक से जा रहे थे लखनऊ वाराणसी हाईवे पर धम्मौर थानाक्षेत्र के पास इनकी बाइक को एक मैजिक की टक्कर से हो गई।
आनन फानन सभी घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से इलाज के लिये जिला अस्पताल लाया गया, लेकिन रस्ते में ही पिता रिजवान ने दम तोड़ दिया जबकि इरफ़ान की इलाज के दौरान मौत हो गई।
वही सबसे छोटे पुत्र गुफरान का इलाज चल रहा है। पिता पुत्र की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मचा हुआ है फ़िलहाल दोनों मृतकों को शव को जिला अस्पताल के मर्चरी हाउस में रखवा दिया गया है और पुलिस को सूचना दे दी गई है।

 

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के पास 2022 के बाद नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (नैक) एक्रिडिटेशन नहीं होने पर मान्यता समाप्त हो जाएगी। सरकार ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को नैक एक्रिडिटेशन से जोड़ने के लिए 167 संस्थानों को मेंटर इंस्टीट्यूशन के लिए भी चयनित कर लिया है। केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार के मकसद से सभी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को नैक एक्रिडिटेशन अनिवार्य किया है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) लाख कोशिशों के बाद भी सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को नैक एक्रिडिटेशन से नहीं जोड़ सका है। 350 से अधिक विश्वविद्यालय व कॉलेज अभी भी नैक एक्रिडिटेशन से नहीं जुड़ेे हैं। यूजीसी ने चयनित 167 मेंटर इंस्टीट्यूशन संस्थानों की सूची सभी विश्वविद्यालयों से सांझा कर दी है। इसका मकसद मेंटर इंस्टीट्यूशन अपने अधीनस्थ संस्थानों को केयर टेकर की तर्ज पर आगे बढ़ने में सहयोग कर सकें। इसमें हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के संस्थान भी मेंटर संस्थान की सूची में शामिल हैं।

यह है नैक एक्रिडिटेशन का फायदा

नैक एक्रिडिटेशन होने से उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता की भी परख हो जाती है। क्योंकि नैक टीम जांच के दौरान गुणवत्ता के साथ छात्र-शिक्षक अनुपात के तहत शिक्षक, योग्य शिक्षक, रिसर्च समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं का जायजा लेती है। नैक एक्रिडिटेशन अनिवार्य के चलते विश्वविद्यालय, कॉलेज या संस्थान गुणवत्ता बढ़ाने पर फोकस करेंगे। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भी नैक एक्रिडिटेशन की परख होती है।

तीन सालों में नैक एक्रिडिटेशन

तीन सालों के भीतर सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को नैक एक्रिडिटेशन से जोड़ने के लिए 167 मेेंटर संस्थान भी चयनित किए गए हैं। इनका काम संस्थानों को जागरूक  करने के साथ नैक एक्रिडिटेशन में सहयोग करना रहेगा।
-प्रो. डीपी सिंह, चेयरमैन, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग


राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दावा किया गया कि 1934 से 1949 के बीच विवादित स्थल पर नियमित रूप से नमाज पढ़ी जाती थी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा कोई सुबूत नहीं है, जिससे साबित हो कि उस दौरान वहां नमाज नहीं पढ़ी जाती थी।

मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जफरयाब जिलानी ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष उस दौरान वहां नियमित नमाज पढ़ी जाने की बात कई। उन्होंने कहा कि यह अलग बात है कि जुमे (शुक्रवार) को अधिक लोग नमाज पढ़ने आते थे, जबकि बाकी दिन वहां कम लोग आते थे।

जिलानी ने कहा कि 1942 में निर्मोही अखाड़े ने जो सूट दायर की थी, उसमें भी विवादित स्थल को मस्जिद बताया गया है। यह नहीं कहा जा सकता कि वहां मस्जिद नहीं थी। 1885 में भी एक याचिका में कहा गया था कि विवादित जमीन के पश्चिमी हिस्से में मस्जिद थी। अभी इसे भीतरी आंगन कहा जाता है।

5 जून, 1934 को बाबरी मस्जिद के ट्रस्टी ने मस्जिद में हुए नुकसान को लेकर आवेदन दिया था। लोक निर्माण विभाग ने मस्जिद की मरम्मत कराई थी। 1934 दंगे में मस्जिद को नुकसान पहुंचाया गया था और मरम्मत के बाद उस जगह पर फिर से अल्लाह लिखा गया था।

गवाह का दावा, 1949 में पढ़ी आखिरी बार नमाज

जिलानी ने कहा कि गवाह मोहम्मद हाशिम ने बयान दिया था कि उन्होंने 22 दिसंबर, 1949 को आखिरी बार नमाज पढ़ी थी। कई और गवाहों के बयान हैं जिन्होंने कहा था कि वर्ष 1934 से 1949 के बीच वहां नमाज पढ़ी जाती थी। नमाज और अजान के लिए इमाम की नियुक्ति होती थी। उन्हें वेतन दिया जाता था। उन्हें दिए जाने वाले वेतन संबंधी कागजात भी मौजूद हैं।

जब आस्था है कि वहां जन्मस्थान है, तो स्वीकार करना होगा : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब आस्था या विश्वास है कि वहां राम जन्मस्थान है, तो उसे स्वीकार करना होगा। हम इस पर सवाल नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन से कहा कि आखिर देवता या जन्मस्थान को क्यों नहीं ‘न्यायिक व्यक्ति’ माना जाना चाहिए?

धवन ने कहा कि इसका क्या प्रमाण है कि हिंदू अनंत काल से उस जगह को भगवान राम का जन्म स्थल मान रहे हैं। स्कंद पुराण और कुछ विदेशी यात्रियों के यात्रा वृत्तांत के आधार पर उसे जन्मस्थान नहीं ठहराया जा सकता। इस पर पीठ के सदस्य जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने धवन से पूछा कि आखिर ऐसी क्या चीजें हैं, जिनके आधार पर देवता या जन्मस्थान को न्यायिक व्यक्ति नहीं माना जाना चाहिए।

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