(राष्ट्रीय युवा दिवस विशेष)
उठो, युवा!
यह कोई साधारण सुबह नहीं है।
यह भारत की आत्मा का आह्वान है।
यह उस अग्नि की पुकार है
जो युगों से तपस्या में थी
और आज तुम्हारी शिराओं में
विवेकानंद बनकर उतर आई है।
उपनिषद गर्जना करते हैं
“उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत्।”
उठो, जागो और श्रेष्ठ लक्ष्य को प्राप्त करो।
क्योंकि सोया हुआ युवा केवल स्वयं नहीं हारता
वह पूरे राष्ट्र की संभावनाओं को निद्रा में धकेल देता है।
तुम केवल युवा नहीं हो।
तुम
अर्जुन की वह भुजा हो
जो संशय के बाद भी धनुष उठाती है।
तुम हनुमान जी की वह उड़ान हो
जो अपनी शक्ति याद आते ही
समुद्र को छोटा कर देती है।
तुम भगवान श्री राम की वह मर्यादा हो
जो सत्ता नहीं, संस्कार से राज्य चलाती है।
गीता तुम्हें ललकारती है
“क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ।”
हे युवा! कायरता को मत अपनाओ।
इतिहास ने तुम्हारे हाथ में
पहले ही धनुष थमा दिया है
अब लक्ष्य साधना तुम्हारा धर्म है।
भारत ने 12 जनवरी को
राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया, क्योंकि राष्ट्र जानता है
देश बजट से नहीं बनते,
देश घोषणाओं से नहीं बनते,
देश चरित्रवान युवाओं से बनते हैं।
यह दिन केवल
स्वामी विवेकानंद की जयंती नहीं है
यह भारत की भविष्य-नीति है।
यह दिन कहता है
युवा आत्महीन नहीं, आत्मनिर्भर बने।
युवा भोगी नहीं, राष्ट्रयोगी बने।
तुलसीदास जी चेतावनी देते हैं—
“पराधीन सपनेहुँ सुख नाही।”
जो अपनी संस्कृति भूलता है,
वह स्वतंत्र होकर भी
भीतर से गुलाम रहता है।
और वही तुलसी
राष्ट्र का सूत्र भी देते हैं—
“परहित सरिस धरम नहि भाई।”
राष्ट्रहित से बड़ा
कोई धर्म नहीं,
कोई साधना नहीं।
आज भारत
युवा से केवल डिग्री नहीं माँगता।
भारत चाहता है
दृढ़ चरित्र,
तकनीकी दक्षता,
संस्कृति से जुड़ी चेतना,
और राष्ट्र के लिए समर्पित हृदय।
स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था
“Give me a hundred fearless youths,
and I will change the destiny of India.”
आज भारत उसी स्वप्न को नीतियों में ढाल रहा है
Skill India, Startup India, Digital India,
और आत्मनिर्भर भारत
इन सबका केंद्र
एक ही है
युवा शक्ति।
याद रखो
जब हनुमान जी जागतें है, तो लंका काँपती है।
जब अर्जुन उठता है,तो कुरुक्षेत्र बदल जाता है।
और जब भारत का युवा जागता है, तो दुनिया का भाग्य बदलता है।
आज केवल युवा दिवस नहीं है।
आज युवा-धर्म का उद्घोष है।
आज यह दिन पूछता है
क्या तुम केवल नौकरी ढूँढोगे?
या
नया भारत गढ़ोगे?
और अंत में
माँ भारती तुम्हें पुकार रही हैं
“मेरे लालो!
मैं इतिहास थी,
अब भविष्य तुम्हारे हाथ में है।
मेरे स्वाभिमान की रक्षा करो,
मेरे सपनों का भारत बनो।”
उठो युवा!
तुम भारत की अंतिम आशा नहीं
तुम उसकी प्रथम शक्ति हो।
जय माँ भारती।
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