प्रकाश न्यूज़ ऑफ़ इंडिया

Latest Post


आयोध्या फैसला:जावेद अख्तर ने मस्जिद को मिली 5 एकड़ की जगह में हॉस्पिटल बनाने की सलाह दी है. जावेद अख्तर ने ट्वीट किया, ये बहुत अच्छा होगा अगर 5 एकड़ मिली जगह पर चेरिटेबल हॉस्पिटल बना दिया जाएगा और इसे सभी समुदाय के लोगों का  समर्थन भी मिलेगा.



It would be really nice if those who get the 5 acres as compensation decide to make a big charitable hospital on that land sponsored and supported by the people all the communities .

7,856 लोग इस बारे में बात कर रहे हैं

सालों से चले आ रहे अयोध्या विवाद पर शनिवार यानी 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जगह रामलला को दे दी है. वहीं इसके बदले मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ दूसरी जगह देने के लिए कहा है. अब इस मामले पर फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज कलाकारों की प्रतिक्रिया आनी भी शुरू हो गई है.
गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने मस्जिद को मिली 5 एकड़ की जगह में हॉस्पिटल बनाने की सलाह दी है. जावेद अख्तर ने ट्वीट किया, ये बहुत अच्छा होगा अगर 5 एकड़ मिली जगह पर चेरिटेबल हॉस्पिटल बना दिया जाएगा और इसे सभी समुदाय के लोगों का समर्थन भी मिलेगा.



सुल्तानपुर:  गनपत सहाय पीजी कॉलेज के प्रबंधक विभिन्न  संगठनों में महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निर्वहन कर चुके डॉ ओम प्रकाश पाण्डेय बजरंगी को वियतनाम में इकोनॉमिक अचीवर्स काउंसिल द्वारा भारत गौरव आवार्ड से सम्मानित किया गया ।

आपको बताते चले कि यह आवार्ड शनिवार को वियतनाम में आयोजित एक कार्यक्रम में इकोनॉमिक अचीवर्स काउंसिल द्वारा 'ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने' के लिए गोल्ड मेडल और भारत गौरव आवार्ड से सम्मानित किया गया ।


बजरंग दल के पूर्व काशी प्रान्त सयोजक डॉ ओम प्रकाश पाण्डेय "बजरंगी" 1991 में जीटीआई कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूर्ण करने के पश्चात भी इंजीनियरिंग जैसे महत्वपूर्ण एवम आर्थिक लाभ से परिपूर्ण में कैरियर न बनाकर सामाजिक,धार्मिक एवं राजनैतिक रूप से पूरी तरह से अपनी सेवा समाज को देने लगे।  इसके पूर्व में अमेरिका के सेंट्रल यूनिवर्सिटी से मानद उपाधि और मास्को के  रूस से वर्ड एनआरआई सम्मान से नवाजे जा चुके हैं डॉ ओम प्रकाश पाण्डेय "बजरंगी"।


उक्त जानकारी ओम प्रकाश पाण्डेय "बजरंगी" के छोटे पुत्र भाजयुमो के जिला उपाध्यक्ष आशीष पाण्डेय ने टेलीफोनिक वार्ता में दी।




तीस साल पहले इसी दिन 9 नवम्बर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेताओं ने 'शिलान्यास' समारोह किया और बाबरी के बगल में एक प्रस्तावित भव्य मंदिर की नींव रखी। 

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मस्जिद 9 नवंबर, 1989 को विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने के लिए वीएचपी और आरएसएस के एक दशक के अभियान की परिणति का संकेत मिलता है, जहां मुगल सम्राट बाबर द्वारा निर्मित बाबरी मस्जिद एक बार लंबा खड़ा था। 

1992 में, मंदिर बनाने के लिए एक बोली लगाने में स्वयंसेवकों के स्कोर से मस्जिद को तोड़ दिया गया, इस कदम ने देश भर में सांप्रदायिक दंगों के बड़े पैमाने पर उन्मादी हो गए। यह महत्व रखता है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आदेश का उच्चारण करने के लिए निर्धारित किया गया है, जिसने पार्टियों - रामलला विराजमान, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा - के बीच साइट को तोड़ दिया।

 अयोध्या में 2.77 एकड़ भूमि पर कानूनी विवाद, जो वर्षों से था, दोनों धार्मिक और राजनीतिक लड़ाई में बदल गया, ब्रिटिश काल में वापस आ गया। हिंदू दलों का दृढ़ विश्वास था कि यह स्थल भगवान राम की जन्मस्थली है और बाबरी मस्जिद के केंद्रीय गुंबद के नीचे एक मंदिर है। दूसरी ओर, मुसलमानों ने दावों को गिनाया और कहा कि भगवान राम की जन्मभूमि होने का एक मात्र विश्वास उनके न्यायिक व्यक्तित्व को नहीं प्रदान करता है। 

पार्टियों ने विभिन्न भूमि दस्तावेजों, इतिहासकारों, पुरातात्विक सर्वेक्षणों को कंटेंट को प्रमाणित करने के लिए संदर्भित किया। 1989 में, दीवानी न्यायालय में इसके विरुद्ध दायर चार मुकदमों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित  कर दिया गया। इसके बाद, उच्च न्यायालय ने स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। 2003 में, सुप्रीम कोर्ट ने साइट पर किसी भी धार्मिक गतिविधि पर रोक लगा दी थी। 

c&p(एएनआई)




सुलतानपुरसुलतानपुर में धारा 144 लागू कर दी गई है जिसका अनुपालन शक्ति से कराया जाएगा।समस्त  जिला वासियों से अनुरोध है कि ग्रुप या समूह में कोई कार्य न करें 2 या 3 से अधिक संख्या में एक स्थान पर एकत्रित न हो।
सोशल मीडिया पर कोई धार्मिक कमेंट ना करें ना ही अफवाह फैलाए और ना ही अफवाहों पर ध्यान दें। यदि आपकी नजर में कोई ऐसा करता पाया जाए तो उसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें।

 क्या है धारा-144 

सीआरपीसी के तहत आने वाली धारा-144 शांति व्यवस्था कायम करने के लिए लगाई जाती है. इस धारा को लागू करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट यानी जिलाधिकारी एक नोटिफिकेशन जारी करता है. और जिस जगह भी यह धारा लगाई जाती है, वहां चार या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते हैं. इस धारा को लागू किए जाने के बाद उस स्थान पर हथियारों के लाने ले जाने पर भी रोक लगा दी जाती है.

 क्या है सजा का प्रावधान 

धारा-144 का उल्लंघन करने वाले या इस धारा का पालन नहीं करने वाले व्यक्ति को पुलिस गिरफ्तार कर सकती है. उस व्यक्ति की गिरफ्तारी धारा-107 या फिर धारा-151 के तहत की जा सकती है. इस धारा का उल्लंघन करने वाले या पालन नहीं करने के आरोपी को एक साल कैद की सजा भी हो सकती है. वैसे यह एक जमानती अपराध है, इसमें जमानत हो जाती है.

क्या है दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी)

दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (Code of Criminal Procedure, 1973) भारत में आपराधिक कानून के क्रियान्यवन के लिये मुख्य कानून है. यह सन् 1973 में पारित हुआ था. इसे देश में 1 अप्रैल 1974 को लागू किया गया. दंड प्रक्रिया संहिता का संक्षिप्त नाम 'सीआरपीसी' है. जब कोई अपराध किया जाता है, तो सदैव दो प्रक्रियाएं होती हैं, जिन्हें पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है. एक प्रक्रिया पीड़ित के संबंध में और दूसरी आरोपी के संबंध में होती है. सीआरपीसी में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.


सुल्तानपुर:  शनिवार को सुबह लगभग 10:00 बजे नगर कोतवाली के करीब नीम के पेड़ पर एक युवक ने चढ़कर तहलका मचा दिया चौंकाने वाली बात तो वो युवक फोन से किसी से बात तो कर रहा लेकिन नीचे खड़े लोगों की बातों का कोई जवाब नहीं दे रहा था। ज्यादा देर होता देख बगल कोतवाली की पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुँच गई और उसे समझाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन युवक न ही किसी से कोई बात कर रहा है और न ही किसी के बात सुनने का का ही प्रयास कर रहा था। इस दौरान वहां सैकड़ों की संख्या में तमाशबीन खड़े लोग उसे देख रहे थे। 

पुलिस की कड़ी मस्कत से घण्टो बाद खुदखुशी करने के लिए पेड़ पर चढ़ा युवक उतरा नीचे,युवक को पुलिस शकुशल लाई कोतवाली नगर, कोतवाली नगर के बगल नीम के पेड़ पर खुदखुशी करने को चढ़ा था युवक।


31 अक्टूबर 2019


लखनऊ : इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) -2019 के तहत, 31 अक्टूबर 2019 को केन्द्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान लखनऊ (वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद) में एक आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के 500 से अधिक छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में अपने उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि डॉ वी पी कंबोज, पूर्व निदेशक, सीडीआईआर-सीडीआरआई, लखनऊ ने कहा, विज्ञान ने बेहतर जीवन स्तर के लिए समाज को नई दिशाएँ दी हैं और वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के कारण ही आज हमारा जीवन इतना आसान हो चुका है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर सोमदेव भारद्वाज ने कहा कि नवाचार और विज्ञान को समाज से जोड़ने की नितांत आवश्यकता है और इस तरह के आयोजनों से शोधकर्ताओं, आविष्कारकों और आम आदमी को एक साथ आने का एक अनूठा मंच मिल रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सफल जीवन की तुलना में सार्थक जीवन अधिक महत्वपूर्ण है, इसलिए आने वाली पीढ़ी को अपने करियर की योजना इस तरह से बनानी चाहिए ताकि वे समाज के लिए अधिक प्रासंगिक हो सकें।
सीएसआईआर-सीडीआरआई वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिभागियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक एवं स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर लोकप्रिय व्याख्यान दिए गए। डॉ अनिल गायकवाड़ ने "स्वस्थ जीवन शैली और चयापचय संबंधी विकारों" के बारे में बात की, डॉ पीएन यादव ने युवा आबादी में मनोदशा संबंधी विकारों पर चर्चा की और डॉ दिब्येंदु बनर्जी ने "जीन और कैंसर" के बारे में जानकारी दी और कैंसर के कारणों और परिणामों पर चर्चा की और साथ ही बताया कि खुद को कैसे इस जानलेवा बीमारी से बचाएं।
इस अवसर पर स्थानीय जमीनी स्तर के अन्वेषक व शोधकर्ताओं को, जिन्होंने इनोवेशन एवं विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करके समाज में इसे लोकप्रिय बनाते हुए राज्य और राष्ट्र स्तर पर अपनी पहचान बनाई है उन्हें नवप्रवर्तक, विज्ञान शिक्षक, विज्ञान पत्रकार, सरकारी/ गैर सरकारी संगठन के रूप में सम्मानित किया गया। जिसमें राधेश्याम पाण्डेय को नवप्रवर्तक व सुशील द्विवेदी को विज्ञान शिक्षक के रूप में सम्मानित किया गया। साथ ही छात्रों ने वाद-विवाद, चित्रकला और विज्ञान मॉडल प्रतियोगिताओं में भाग लिया।

26अक्टूबर2019







सुल्तानपुर/कादीपुर: के विजेथुआ महावीरन धाम पर 51 हजार दीपोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें बतौर मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शंकर शुक्ला शामिल होने पहुंचे। इस दौरान आरती और भजन का भी आयोजन किया गया। विदित हो अयोध्या में पांच लाख दीपोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया था इसी कड़ी में सुल्तानपुर के सूरापुर स्थित बिजेथुआ महावीरन धाम में 51 हजार दीपोत्सव का आयोजन किया गया।जहां देर शाम मकरी कुंड में 51 हजार दीप प्रज्वलित किए गए ये आयोजन भाजपा के प्रदेश महामंत्री सर्वेश मिश्रा (पूर्वांचल प्रकोष्ठ हरियाणा)के नेतृत्व में किया गया।


कार्यक्रम का संचालन कर रहे भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शिवकांत मिश्रा ने आगंतुक विशिष्ट अतिथि एवम मुख्य अतिथियो का परिचय कराया। कार्यक्रम की सुरुआत अंजीनी लला हनुमानजी जी के पुष्पार्जन एवं द्विपार्जन से हुआ।
वही इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शंकर शुक्ला शामिल होने पहुंचे। जहां राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शंकर शुक्ला का माल्यार्पण कर उन्हें साल, स्मृति चिन्ह, और बजरंग बली हनुमान जी का गदा आयोजक सर्वेश मिश्रा द्वारा भेंट किया गया जिसके बाद काशी के ज्योतिषाचार्य आचार्य विनय शास्त्री एवम उनके शिष्यों के द्वारा काशी के गंगा आरती के तर्ज पर आरती की गई।

कार्यक्रम की तैयारी की झलक
 अपने उदबोधन में विशिष्ट अतिथि भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने बताया कि अयोध्य वह स्थान है जहां कालिनेमि का वध किया गया था।कालिनेमि का उल्लेख रामचरित मानस के लंका कांड में है।लक्ष्मण जब मेघनाथ द्वारा मारे गए शक्तिबाण से मूर्च्छित हो जाते हैं तो हनुमानजी सुषेन वैद्य की सलाह पर धौलागिरी की ओर संजीवनी बूटी लाने के लिए प्रस्थान करते हैं। रावण द्वारा भेजा गया मुनि वेशधारी कालिनेमि राक्षस हनुमानजी का मार्ग अवरुद्ध करता है। कालिनेमि रचित सरोवर आश्रम को देख हनुमानजी की जल पीने की इच्छा हुई। हनुमानजी के सरोवर में प्रवेश करते ही अभिशापित अप्सरा मकरी के रूप में, ने उनका पैर पकड़ लिया। मकड़ी ने कालिनेमि का रहस्य बताते हुए हनुमानजी से कहा,  मुनि न होई यह निशिचर घोरा। मानहुं सत्य बचन कपि मोरा।।’  ऐसा कहकर मकड़ी लुप्त हो गई। और हनुमान जी मायावी राछस कालनेमि का वध कर संजीवनी बूटी लाने चले गए।यही कालिनेमि रचित सरोवर बिजेथुआ महाबीरन के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
उन्होंने यह भी बताया कि जब हम लोग छोटे छोटे थे तो अपनी माता जी के साथ मानता पूरा करने के लिये यहाँ आते थे।विशिष्ट अतिथि प्रेम शुक्ला द्वारा बीच बीच मे अवधी भाषा का प्रयोग करना अये हुये हजारों भक्त जनों का मन मोह लिया।
हनुमान जी का दर्शन करते भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला

       इनसेट 
क्या कहते है आयोजक सर्वेश मिश्रा?
कार्यक्रम के आयोजन के सापेक्ष मिडिया से बातचीत में आयोजक BMS ग्रुप के चेयरमैन,भाजपा के प्रदेश महामंत्री(पूर्वांचल प्रकोष्ठ हरियाणा) सर्वेश मिश्रा ने बताय कि जिस तरह पुत्र के पराक्रम से पिता आनंदित होता है, शिष्य से पराभूत होने में गुरु गौरव का अनुभव करते हैं, उसी तरह भक्त की महिमा वृद्धि में प्रभु प्रसन्नता का अनुभव करते हैं।रामचरित मानस का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हनुमान जी माता सीता जी की शोध करके जब वापस आए तब श्री राम कहते हैं- 'हनुमान! तेरे मुझ पर अगणित उपकार हैं, इसके लिए मेरे एक-एक प्राण निकालकर दूँगा तो भी कम होगा क्योंकि तेरा प्रेम मेरे लिए पंचप्राणों से भी अधिक है, इसलिए मैं तुझे सिर्फ आलिंगन ही देता हूँ-  'एकैकस्योपकारस्य प्राणान्‌ दास्यामि ते कपे।'  राम कहते हैं कि हनुमान ने ऐसा दुष्कर कार्य किया है कि लोग जिसे स्वप्न में भी नहीं कर सकते।ऐसे में परम् भक्त अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता हनुमानजी के जन्मोत्सव के बीना अयोध्या में मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम जी के आगमन का द्वीपोत्सव अधूरा है, इसीलिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। 

वहीं इस आयोजन में कादीपुर विधायक राजेश गौतम, सदर विधायक प्रतिनिधि रूपेश सिंह, जिला अध्यक्ष जगजीत सिंह छंगू, पूर्व जिला अध्यक्ष करुणा शंकर मिश्रा, वरिष्ठ सर्जन समाजसेवी डॉ ए के सिंह,संजय सिंह त्रिलोकचंदी, संदीप अग्रहरी,डॉक्टर अरुण कुमार सिंह,जीवन द्वीप राय,राजीव तिवारी, शिवकांत मिश्रा,सुनील श्रीवास्तव, अनिल पाण्डेय, शेषमणि मौर्य, शुभम सिंह,विनोद पांडेय, समेत हजारों की संख्या में संभ्रांत लोग मौजूद रहे।
इस पूरे कार्यक्रम में जहाँ हजारों की संख्या में हनुमानजी के भक्तों का जमावड़ा लगा था वही कादीपुर के कोतवाल द्वार बहुत ही सूझ बूझ से पूरे व्यवस्था को संभाला गया जिससे कार्यक्रम पूरी तरह से सफल रहा।



दीपावली:पर्व को मनाने से संबंधित वैसे तो अनेकों कथाएं मिलती हैं। जिनमें सबसे ज्यादा प्रचलित है भगवान राम की इस दिन घर वापसी होना। दिवाली के दिन राम दरबार के साथ माता लक्ष्मी और गणेश जी की भी पूजा की जाती है।

 दीपों का त्योहार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। जो इस बार 27 अक्टूबर को है। इस पर्व को मनाने से संबंधित वैसे तो अनेकों कथाएं मिलती हैं। जिनमें सबसे ज्यादा प्रचलित है भगवान राम की इस दिन घर वापसी होना। दिवाली के दिन राम दरबार के साथ माता लक्ष्मी और गणेश जी की भी पूजा की जाती है। दिवाली पूजन प्रदोषकाल में किया जाता है

           दिवाली पूजन मुहूर्त
दिवाली लक्ष्मी पूजा रविवार, अक्टूबर 27, 2019 पर
पूजा मुहूर्त – 06:43 पी एम से 08:15 पी एम

आवधि – 01 घण्टा 32 मिनट्सप्रदोष काल – 05:41 पी एम से 08:15 पी एम
वृषभ काल – 06:43 पी एम से 08:39 पी एम
अमावस्या तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 27, 2019 को 12:23 पी एम बजे
अमावस्या तिथि समाप्त – अक्टूबर 28, 2019 को 09:08 ए एम बजे
पूजन में सर्वप्रथम स्वस्तिवाचन, कलशपूजन, संकल्प लेकर श्रीगणेश, महालक्ष्मी, ऋद्धि-सिद्धि, इन्द्र, वरूण, कुबेरभण्डारी, शक्तियों सहित  ब्रह्मा, विष्णु, महेश, कुलदेवता, स्थानदेवता, सूर्यादि समस्त ग्रह नक्षत्र की पूजा अर्चना करें। लक्ष्मी तथा कुबेर के मंत्रों का यथा शक्ति जप करेें। पूजा के पश्चात् लक्ष्मी जी की आरती, मंत्र पुष्पांजली तथा क्षमा प्रार्थना करें। बड़़ों का आशीर्वाद लें। छोटों को भेंट-उपहार दें।




सुल्तानपुर: नगर के कादीपुर तहसील मे स्थित पौराणिक स्थल विजेथुआ महावीरन मे दीपावली की पूर्व संध्या यानी 26 अक्टूबर को सायं 3:00 बजे से येतिहासिक हनुमान जन्मोत्सव का आयोजन किया जाना है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम मे अंजनी लला की आरती 51 हजार द्वीपो से काशी के तर्ज पर गंगा आरती के साथ-साथ भव्य भजन संध्या का आयोजन होना सुनिश्चित हुआ है।
BMS ग्रुप के डायरेक्टर और भा•ज•पा के प्रदेश महामंत्री (पूर्वान्चल प्रकोष्ट हरियाणा) और कर्यक्रम के आयोजक सर्वेश मिश्रा ने टेलीभोनिक वार्ता मे बताया की कार्यक्रम मे होने वाली हजारो की संख्या के लिए सारी तैयारी युद्ध स्तर पर है।

आइये जानते है विजेथुआ महावीरन के बारे मे

 सुल्तानपु: सुल्तानपुर में एक ऐसी जगह है जहां की मान्यता है कि इसी स्थान पर हनुमान जी ने राक्षस कालनेमि का वध किया था। यह जगह आज एक सिद्ध पीठ के रूप में मशहूर है। इस प्रसिद्ध मंदिर के बारे में ये भी मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। यहां वो तालाब भी है जहां हनुमान जी ने कालनेमि के वध से पहले स्नान किया था। यहां दूर-दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। जिले की कादीपुर तहसील में विजेथुवा महावीरन नाम से हनुमान जी का मंदिर रामभक्ति और वीरता का प्रतीक है। पुराणों में उल्लेख है कि इसी स्थान पर हनुमान जी ने कालनेमि राक्षस का वध किया था।
  जमीन में धंसा मूर्ति का एक पैर
मंदिर प्रागण मे स्थित हनुमान जी की प्रतिमा

मंदिर में स्थित हनुमान जी की मूर्ती इस मंदिर की प्राचीनता का प्रमाण है। मूर्ति का एक पैर जमीन में धंसा हुआ है, जिसकी वजह से मूर्ति थोड़ी तिरछी है।
पुरातत्व विभाग ने मूर्ति की प्राचीनता जांचने और पुजारियों ने मूर्ति को सीधा करने के लिए उसकी खुदाई शुरू कराई। लेकिन 100 फिट से अधिक खुदाई कराने के बाद भी मूर्ति के पैर का दूसरा सिरा नही मिला। जिसके बाद इस मंदिर को चमत्कारी माना जाने लगा।

  कालनेमि ने यहीं रोका था हनुमानजी का रास्ता

रामायण में इस स्थान का जिक्र है कि जब श्रीराम और रावण के बीच चल रहे युद्ध में लक्ष्मण जी को बाण लगा और वो मूर्छित हो गए तो वैद्यराज सुषेण के कहने पर हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की तरफ चले।
हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने में असफल हो जाएं इसके लिए रावण ने अपने एक मायावी राक्षस कालनेमि को भेजा, ताकि वो रास्ते में ही हनुमान जी का वध कर दे।
कालनेमि मायावी था और उसने एक साधु का वेश धारण कर रास्ते में राम-राम का जाप करना शुरू कर दिया। थके-हारे हनुमान जी राम-राम धुन सुन कर वहीं रुक गए।।

यहां हनुमान जी ने किया था पोखर मे स्नान
                प्रागण मे स्थित पोखर मकडी कुड
रामायण के अनुसार साधू के वेश में कालनेमि ने हनुमान जी से उनके आश्रम में रुक कर आराम करने का आग्रह किया। हनुमान जी उसकी बात में आ गए और उसके आश्रम में चले गए।उसने हनुमान जी से आग्रह किया कि वह पहले स्नान कर लें उसके बाद भोजन की व्यवस्था की जाए। हनुमान जी स्नान के लिए तालाब में गए ।

यहां हनुमान जी ने किया था कालनेमि का वध...

 जब हनुमान जी इस मकरी कुंड में स्नान कर रहे थे तो कहते हैं कि कालनेमि मगरमच्छ का रूप धारण कर इस कुंड में घुस आया और हनुमान जी को खा जाना चाहा।
हनुमान जी से उसका भीषण युद्ध हुआ और हनुमान जी ने इसी कुंड में उसका वध कर दिया। कालनेमि के वध के बाद हनुमान जी सीधे संजीवनी लेने हिमालय की ओर चले गये ।

आज भी मौजूद है पोखर मकडी कुड



जिस तालाब में हनुमान जी ने स्नान किया था वो आज भी मौजूद है। आज इस तालाब का नाम मकरी कुंड है। लोग मंदिर में दर्शन करने के पूर्व इस कुंड में स्नान करते हैं।बताया जाता है कि इस कुंड में स्नान करने से लोगों के पाप कम हो जाते हैं।

शोभा यात्रा का दृश्य
सुल्तानपुर: रविवार 6अक्टूबर2019
विश्वहिंदू परिषद के बैनर तले रविवार को रमलीला मैदान विद्यालय से दुर्गा वाहिनी की शाेभा यात्रा निकाली गई।   शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गो जैसे ठठेरी बाजार, सब्जी मंडी,बसस्टैण्ड,पंचमौखी चौराहा शाहगंजचौराहे का परिभ्रण कर वापस विद्यालय पहुंची । शोभायात्रा का नगर के लोगों ने स्वागत किया। इस दौरान दुर्गा वाहिनी की सदस्यों ने शस्त्र पूजन दुर्गा चालिसा का पाठ किया।

आदि शक्ति मा दुर्गा का पूजन करती दुर्गा वाहिनी की मातृ शक्ति
कार्यक्रम का प्रारम्भ आदि शक्ति मा दुर्गा जी के पूजन एवम् दुर्गा चालिसा पाठ से प्रारम्भ हुआ। इस मौके पर जिला संयोजिका प्रीती उपाध्याय ने बताया कि दुर्गा वाहिनी की स्थापना 1984 में हुई था। यह विश्व हिंदू परिषद का एक विंग है। इसके माध्यम से हिंदू बहनों को एकत्रित किया जाता है।  सभी बहनें और माताएं मां दुर्गा का रूप होती हैं। किसी भी कार्य को करने से पहले मां का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए। इस यात्रा से लोगों को यह संदेश दिया गया है कि महिलाएं भी आज पुरूषों की अपेक्षा कहीं आगे है। दुर्गा का दूसरा रूप माताएं होती है। नवरात्र के अवसर पर नौ दिनों का अखंड पाठ किया जाता है और नवमी के दिन 11 महिलाओं को मां दुर्गा समझ कर पांव धोकर प्रसाद दिया जाता है और आशीर्वाद लिया जाता है। 


  शोभा यात्रा का स्वागत करते प्रान्तीय सुरक्षा प्रमुख
कार्यक्रम की इस मधुरिम बेला मे शुभनारायन वीएचपी प्रान्त अध्यक्ष काशी प्रान्त, एडवोकेट नागेन्द्र सिह वीएचपी जिला अध्यक्ष, उमाकान्त वीएचपी विभाग संगठन मंन्त्री,आन्नद प्रकाश शुक्ला वीएचपी प्रान्त सुरक्षा प्रमुख,दुर्गा वाहिनी जिला संयोजिका प्रीती उपाध्याय संजय तिवारी, सौरभ पाण्डेय 'मुनी',सुशील सिह ,रमेश दूबे, गोपाल,डा शिव जी,अनुराग उपाध्याय,प्राशान्त गौरव,नरेन्द्र जायसवाल,राजेश्वर सिह समेत सैकडो की संख्या मे मातृ शक्ति समेत हिन्दू जनमानस उपस्थित रहा । उक्त जानकारी विहीप मीडिया प्रभारी शुभम तिवारी ने दी।



                 
                            फाइल फोटो

सुल्तानपुर-अतिवृष्टि से प्रभावित कुडवार ग्राम सभा के पूरे दयाराम( टाणा तिवारी )के अन्तर्गत ओम प्रकाश तिवारी के पशुशाला और भुसैला पर लगातार हो रही बारिष के कारण नीम का विशालकाय वृक्ष गिर गया,जिसके कारण पशुशाला और भुसैला पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गया।
भुसैले मे रखा पशुओ का भूसा चारा ,चारा मशीन क्षतिग्रस्त हो गई।घटना के समय पशुओ के बाहर रहने के कारण पशु पूरी तरह सुरक्षित है।पशुशाला और भुसैला के मलबे मे तब्दील हो जाने के कारण पशु भीषण बर्षा के बीच खुले आसमान मे रहने को मजबूर है।अतिवृष्टि के कारण गांव  के कच्चे  मकान गिरने की कगार पर हैं, फसलें भी जलमग्न हो गयी हैं।










कलश स्थापना की तिथि: 29 सितंबर 2019
शुभ मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 16 मिनट से 7 बजकर 40 मिनट तक 
कुल अवधि: 1 घंटा 24 मिनट



नवरात्रि त्योहार का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. ये त्योहार देश के कोने-कोने में मनाया जाता है. इस पर्व में पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दौरान लोग 9 दिनों तक उपवास भी रखते हैं. नवरात्रि में नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के पहले दिन ही कलश स्थापना की जाती है. आइए जानते हैं कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े कुछ नियम.

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि 29 सितंबर से शुरू होगी और इसी दिन कलश की स्थापना की जाएगी. मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए कलश की स्थापना हमेशा उचित मुहूर्त में ही करनी चाहिए. इस बार नवरात्रि पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर 7 बजकर 40 मिनट तक है. इसके अलावा, आप दिन में भी कलश स्थापना कर सकते हैं. इसके लिए शुभ मुहूर्त दिन के 11 बजकर 48 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक है.



नवरात्रि में ऐसे करें कलश स्थापना

नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी मां की आराधना करने से मां अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं. नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना की जाती है. घट स्थापना का मतलब है कलश की स्थापना करना.

कलश स्थापना करते समय नदी की रेत का उपयोग करें. इस रेत में जौ भी डालें. इसके बाद कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी, द्रव्य, पुष्पादि डालें. फिर 'ॐ भूम्यै नमः' कहते हुए कलश को सात अनाजों के साथ रेत के ऊपर स्थापित करें. कलश की जगह पर नौ दिन तक अखंड दीप जलते रहना चाहिए.

कलश स्थापना से जुड़े खास नियम


  • -कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में करें

  • -कलश स्थापना करने के लिए पूजन स्थल से अलग एक पाटे पर लाल व सफेद कपड़ा बिछाएं. इस पर अक्षत से अष्टदल बनाकर इस पर जल से भरा कलश स्थापित करें.

  • कलश का मुंह खुला ना रखें, उसे किसी चीज से ढक देना चाहिए. कलश को किसी ढक्कन से ढका है, तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें ।

  • अगर कलश की स्थापना कर रहे हैं, तो दोनों समय मंत्रों का जाप करें, चालीसा या सप्तशती का पाठ करना चाहिए.

  • पूजा करने के बाद मां को दोनों समय भोग लगाएं, सबसे सरल और उत्तम भोग हैं लौंग और बताशा।

  • मां के लिए लाल फूल सर्वोत्तम होता है, पर मां को आक, मदार, दूब और तुलसी बिल्कुल ना चढ़ाएं.

  • नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिन तक अपना खान-पान और आहार सात्विक रखें.


मां दुर्गा के नौ स्वरूप नौ ग्रहों के प्रतीक हैं

आपको बता दें कि नवरात्रि में मां के जिन नौ रूपों की उपासना और आराधना की जाती है वास्तव में वह नौ ग्रहों की पूजा है। आइए जानते हैं कैसे:
मां स्कंदमाता: यह देवी मां का पांचवां स्वरूप हैं। देवी स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इनकी आस्था से बुध ग्रह के बुरे प्रभाव से पार पाया जा सकता है।
मां कात्यायनी: देवी मां का छठा स्वरूप है ये। देवी कात्यायनी का ये स्वरूप बृहस्पति ग्रह का प्रतीक है। देवी की पूजा से बृहस्पति ग्रह को शांत किया जा सकता है।
मां कालरात्रि: देवी कालरात्रि मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं और ये शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं।
मां महागौरी: ये मां अम्बे का आठवां स्वरूप है। देवी महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इसलिए जिन राहु की महादशा हो वे इन देवी को अवश्य प्रसन्न करें।
मां सिद्धिदात्री: देवी के नौवें अवतार का नाम है देवी सिद्धिदात्री। ये केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं।


MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget