नवरात्रि में कैसे करें कलश स्थापना? जानें शुभ मुहूर्त और नियम ।

कलश स्थापना की तिथि: 29 सितंबर 2019
शुभ मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 16 मिनट से 7 बजकर 40 मिनट तक 
कुल अवधि: 1 घंटा 24 मिनट



नवरात्रि त्योहार का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. ये त्योहार देश के कोने-कोने में मनाया जाता है. इस पर्व में पूरे 9 दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है. इस दौरान लोग 9 दिनों तक उपवास भी रखते हैं. नवरात्रि में नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि के पहले दिन ही कलश स्थापना की जाती है. आइए जानते हैं कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े कुछ नियम.

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि 29 सितंबर से शुरू होगी और इसी दिन कलश की स्थापना की जाएगी. मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए कलश की स्थापना हमेशा उचित मुहूर्त में ही करनी चाहिए. इस बार नवरात्रि पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर 7 बजकर 40 मिनट तक है. इसके अलावा, आप दिन में भी कलश स्थापना कर सकते हैं. इसके लिए शुभ मुहूर्त दिन के 11 बजकर 48 मिनट से लेकर 12 बजकर 35 मिनट तक है.



नवरात्रि में ऐसे करें कलश स्थापना

नवरात्रि में नौ दिनों तक देवी मां की आराधना करने से मां अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं. नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना की जाती है. घट स्थापना का मतलब है कलश की स्थापना करना.

कलश स्थापना करते समय नदी की रेत का उपयोग करें. इस रेत में जौ भी डालें. इसके बाद कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी, द्रव्य, पुष्पादि डालें. फिर 'ॐ भूम्यै नमः' कहते हुए कलश को सात अनाजों के साथ रेत के ऊपर स्थापित करें. कलश की जगह पर नौ दिन तक अखंड दीप जलते रहना चाहिए.

कलश स्थापना से जुड़े खास नियम


  • -कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में करें

  • -कलश स्थापना करने के लिए पूजन स्थल से अलग एक पाटे पर लाल व सफेद कपड़ा बिछाएं. इस पर अक्षत से अष्टदल बनाकर इस पर जल से भरा कलश स्थापित करें.

  • कलश का मुंह खुला ना रखें, उसे किसी चीज से ढक देना चाहिए. कलश को किसी ढक्कन से ढका है, तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें ।

  • अगर कलश की स्थापना कर रहे हैं, तो दोनों समय मंत्रों का जाप करें, चालीसा या सप्तशती का पाठ करना चाहिए.

  • पूजा करने के बाद मां को दोनों समय भोग लगाएं, सबसे सरल और उत्तम भोग हैं लौंग और बताशा।

  • मां के लिए लाल फूल सर्वोत्तम होता है, पर मां को आक, मदार, दूब और तुलसी बिल्कुल ना चढ़ाएं.

  • नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिन तक अपना खान-पान और आहार सात्विक रखें.


मां दुर्गा के नौ स्वरूप नौ ग्रहों के प्रतीक हैं

आपको बता दें कि नवरात्रि में मां के जिन नौ रूपों की उपासना और आराधना की जाती है वास्तव में वह नौ ग्रहों की पूजा है। आइए जानते हैं कैसे:
मां स्कंदमाता: यह देवी मां का पांचवां स्वरूप हैं। देवी स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इनकी आस्था से बुध ग्रह के बुरे प्रभाव से पार पाया जा सकता है।
मां कात्यायनी: देवी मां का छठा स्वरूप है ये। देवी कात्यायनी का ये स्वरूप बृहस्पति ग्रह का प्रतीक है। देवी की पूजा से बृहस्पति ग्रह को शांत किया जा सकता है।
मां कालरात्रि: देवी कालरात्रि मां दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं और ये शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं।
मां महागौरी: ये मां अम्बे का आठवां स्वरूप है। देवी महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इसलिए जिन राहु की महादशा हो वे इन देवी को अवश्य प्रसन्न करें।
मां सिद्धिदात्री: देवी के नौवें अवतार का नाम है देवी सिद्धिदात्री। ये केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं।


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